Chath Puja Kab Hai - छठ पूजा कब है, Chathpuja date, time, vidhi, importance



छठ पूजा कब है? — समय और तारीख

  • 2025 में छठ पूजा: 25 अक्टूबर (शनिवार) से 28 अक्टूबर (मंगलवार) तक मनाई जाएगी। (India Today)

  • चार दिवसीय कार्यक्रम इस प्रकार है:

    1. नहाय-खाय — 25 अक्टूबर (India Today)

    2. खरना — 26 अक्टूबर (The Economic Times)

    3. संध्या अर्घ्य — 27 अक्टूबर शाम को (ABP Live)

    4. उषा अर्घ्य (उठान) — 28 अक्टूबर सुबह सूरज को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त किया जाता है। (India Today)

ध्यान दें कि कुछ स्रोतों में तारीखों में भिन्नता हो सकती है (जैसे Calendarr वेबसाइट पर 28-31 अक्टूबर का उल्लेख है)। (Calendarr) इसलिए अपनी लोकल पंचांग या धार्मिक कैलेंडर देखना बड़‍ा सहायक होगा।


छठ पूजा का महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

छठ पूजा एक बहुत ही पवित्र एवं अनूठा हिंदू त्योहार है, खासकर पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश) और नेपाल में। इस पूजा में मुख्य रूप से सूर्य देवता (सूर्य-भगवान) और उनकी बहन / स्त्री रूप छठी मैया की पूजा की जाती है। (NDTV Food)

  • यह त्योहार वेदों की परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है और प्रकृति, सूर्य ऊर्जा एवं जीवन-चक्र के प्रति कृतज्ञता दर्शाता है। (NDTV Food)

  • छठ पूजा में कड़े व्रत, पवित्र स्नान, और नदी तट पर अर्घ्य देना जैसी प्रथाएँ होती हैं, जो भक्ति, संयम और अनुशासन को दर्शाती हैं। (www.ndtv.com)

  • कई परिवारों में, यह पूजा पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है — माता-पिता अपनी संतानों और आने वाली पीढ़ियों के लिए छठी मैया से स्वास्थ्य, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हैं। (NDTV Food)


छठ पूजा का आयोजन — चार दिन: दिन-क्रम और रस्में

नीचे 2025 में छठ पूजा के चार दिनों का विस्तृत क्रम और उनकी रस्में दी जा रही हैं:

दिन नाम रस्म / कर्यकलाप
दिन 1 (25 अक्टूबर) नहाय-खाय भक्त गंगा, तालाब आदि में पवित्र स्नान करते हैं और शुद्ध भोजन (शाकाहारी) ग्रहण करते हैं। (India Today)
दिन 2 (26 अक्टूबर) खरना पूरा दिन निर्जला व्रत (खाना & पानी नहीं); शाम को गुड़ की खीर, पूरियाँ और फल-प्रसाद चढ़ाकर व्रत खोला जाता है। (The Economic Times)
दिन 3 (27 अक्टूबर) संध्या अर्घ्य (Evening Arghya) शाम को नदी किनारे इकट्ठा होकर, भक्त सूरज देवता को अर्घ्य (जल अर्पण) करते हैं। (ET Now)
दिन 4 (28 अक्टूबर) उषा अर्घ्य (Morning Arghya) / व्रत समाप्ति सुबह उठ कर उगते हुए सूरज को अर्घ्य दिया जाता है, तत्पश्चात व्रत समाप्त किया जाता है। (India Today)

छठ पूजा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व

  1. प्राकृतिक ऊर्जा का सम्मान
    छठ पूजा प्रकृति और सूर्य की ऊर्जा को समर्पित है। सूर्य जीवन का मूल स्त्रोत है, और उसकी पूजा करने से विश्वास होता है कि जीवन की सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।

  2. स्वच्छता और आत्म-शुद्धि
    नहाय-खाय दिन में नदी स्नान और साधारण भोजन आत्म-शुद्धि का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि भक्ति के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों रूप से स्वच्छता महत्वपूर्ण है।

  3. संयम और अनुशासन
    खरना और 36-घंटे का निर्जला व्रत भक्तों में अनुशासन और संयम की भावना जगाता है। यह दिखाता है कि व्रत सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण का भी अभ्यास है।

  4. समुदाय और पारिवारिक जुड़ाव
    छठ पूजा में परिवार और समाज एक साथ नदी किनारों पर इकट्ठा होते हैं, अर्घ्य देते हैं और प्रसाद बाँटते हैं। यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।


कुछ उपयोगी टिप्स (Tips) छठ पूजा मानने वालों के लिए

  • अपने स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें क्योंकि पूजा-तिथियाँ क्षेत्र के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकती हैं।

  • नदी तट या तालाब किनारे पूजा के लिए समय पहले से निर्धारित कर लें क्योंकि लोगों की भीड़ हो सकती है।

  • व्रत के दिन निर्जला रहने के लिए पहले दिन (नहाय-खाय) में हल्का यानी पौष्टिक भोजन करें ताकि अगला दिन व्रत आसान हो।

  • प्रसाद की तैयारी (जैसे खीर, फल, thekua आदि) समय से पहले शुरू करें ताकि शाम-सुबह के अर्घ्य में सब व्यवस्थित रहे।

  • पर्यावरण का ध्यान रखें — नदी किनारे पूजा करते समय कूड़ा न फैलाएँ, मिट्टी के दीयों का उपयोग करें और प्लास्टिक कम इस्तेमाल करें।


निष्कर्ष

छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि भक्ति, शुद्धता, अनुशासन, और कृतज्ञता का गहरा प्रतीक है। 2025 में यह पूजा 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर के बीच होगी, जिसमें चार दिन की विशेष विधियाँ होती हैं: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।

यह पर्व न केवल आध्यात्मिक अनुभव देता है, बल्कि पारिवारिक और सामुदायिक जुड़ाव को भी बढ़ाता है। जो लोग छठ पूजा करते हैं, उनमें प्रकृति-प्रेम, आत्म-नियंत्रण और एक दूसरे के प्रति कृतज्ञता की भावना गहराती है।

छठ पूजा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग व्यंजन, या लोकगीत और छठ गीत

छठ पूजा 2025 – लेख श्रृंखला (Full Series Outline)

1️⃣ छठ पूजा 2025: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


व्रत के नियम और तैयारी


पूजन सामग्री की पूरी सूची


नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की विस्तृत विधि


2025 के सही शुभ मुहूर्त (सूर्योदय-सूर्यास्त समय सहित)


2️⃣ छठ पूजा के पारंपरिक भोग और व्यंजन


ठेकुआ, गुड़-खीर, रसीले फल और नारियल का महत्व


हर व्यंजन की धार्मिक और स्वास्थ्य दृष्टि से व्याख्या


घर पर बनाने की आसान विधि


प्रसाद का शुद्धता और नियम


3️⃣ छठ पूजा के प्रसिद्ध लोकगीत और भक्ति गीत


बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के लोकप्रिय छठ गीतों की सूची


“केलवा जे फरेला घवद से”, “ऊग हो सूरज देव” जैसे गीतों के अर्थ


इन गीतों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व


आधुनिक छठ गीतों की लोकप्रियता


4️⃣ छठ पूजा का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण


सूर्य उपासना और शरीर पर इसका वैज्ञानिक प्रभाव


उपवास और जल अर्घ्य का मनोवैज्ञानिक लाभ


सूर्य ऊर्जा, विटामिन D, और मानसिक शांति से जुड़ा पक्ष


कैसे यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और सकारात्मकता को बढ़ाता है


5️⃣ छठ पूजा की तैयारी और सजावट आइडिया


घर और घाट की सजावट के पारंपरिक और मॉडर्न तरीके


इको-फ्रेंडली सजावट सामग्री की सूची


पूजा स्थल को सुरक्षित और सुंदर बनाने के टिप्स


बच्चों और युवाओं को शामिल करने के रचनात्मक उपाय



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