5 सितम्बर 2025 का अवकाश : ईद-ए-मिलाद / मिलाद-उन-नबी School Holiday
भारत एक बहुधर्मी और सांस्कृतिक विविधता वाला देश है। यहां विभिन्न धर्मों के पर्व और त्यौहार पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं। इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है ईद-ए-मिलाद जिसे मिलाद-उन-नबी या बरावफात भी कहा जाता है। वर्ष 2025 में यह पवित्र पर्व 5 सितम्बर, शुक्रवार को मनाया जाएगा और इस दिन भारत सरकार व अधिकांश राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
ईद-ए-मिलाद का महत्व
ईद-ए-मिलाद इस्लाम धर्म के संस्थापक हज़रत मोहम्मद साहब की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला पर्व है। माना जाता है कि इस दिन 12 रबी-उल-अव्वल को पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद का जन्म हुआ था। इस्लामी इतिहास में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है।
इस अवसर पर मुसलमान भाई अपने प्यारे नबी की शिक्षाओं, उनके जीवन आदर्शों और उपदेशों को याद करते हैं। मोहम्मद साहब ने मानवता, भाईचारा, समानता और दया का संदेश दिया। ईद-ए-मिलाद उसी महान विचारधारा को आत्मसात करने का अवसर है।
ईद-ए-मिलाद का उत्सव
ईद-ए-मिलाद के दिन मस्जिदों और घरों को सजाया जाता है। जुलूस निकाले जाते हैं, जिनमें लोग नबी के सम्मान में नारे लगाते हुए चलते हैं। धार्मिक सभाओं में कुरान शरीफ का पाठ किया जाता है और नबी की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला जाता है।
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कई स्थानों पर कव्वालियां और नात-ए-शरीफ गाए जाते हैं।
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गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना इस दिन पुण्य का कार्य माना जाता है।
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बड़े पैमाने पर सामूहिक भोज (लंगर) का आयोजन भी किया जाता है।
यह दिन केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है।
अवकाश का महत्व
5 सितम्बर 2025 को भारत में केंद्र और अधिकांश राज्य सरकारों के कार्यालय, विद्यालय, बैंक एवं कई अन्य संस्थान अवकाश रहेंगे। शेयर बाजार भी इस दिन बंद रहेगा। यह अवकाश न केवल मुस्लिम समुदाय के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए एकता और सौहार्द का संदेश देता है।
भारत में विशेष आयोजन
भारत के अलग-अलग राज्यों में ईद-ए-मिलाद को भव्य रूप से मनाया जाता है—
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जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में धार्मिक जुलूस निकलते हैं।
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महाराष्ट्र के मुंबई शहर में मिलाद की रौनक अलग ही नजर आती है।
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तेलंगाना और कर्नाटक में मस्जिदों को सजाकर विशेष प्रार्थना सभा आयोजित होती है।
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केरल में भी मुस्लिम समाज बड़े पैमाने पर सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है।
ईद-ए-मिलाद का संदेश
हज़रत मोहम्मद साहब ने हमेशा इंसानियत की सेवा करने, भाईचारा बढ़ाने और सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। ईद-ए-मिलाद हमें याद दिलाता है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का आदर्श मार्ग भी है।
निष्कर्ष
5 सितम्बर 2025 का अवकाश केवल एक सरकारी छुट्टी भर नहीं है, बल्कि यह दिन हमें एक महान व्यक्तित्व की शिक्षाओं को अपनाने और मानवता की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। ईद-ए-मिलाद हमें यह संदेश देती है कि दुनिया में अमन, शांति और भाईचारा कायम रखना ही सबसे बड़ी इबादत है।
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